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Saturday, 15 June 2013

Love You Mamaji !!


 
 
As the days are passing by,

The urge to talk to you is getting even stronger…
 I know it’s impossible,

I still wonder if even once god could make it possible…
 
 
There is so much we never cared for,

So much appreciable you did to our lives…

We never though this will happen so early,

It taught us there is never a right time…
 


The good you accepted the bad you ignored,

That made the love increase now even more…


You always made your presence felt so subtle,

Still you do that in our thoughts…




How much did you care how much you loved,
Wish we could have thought of it when you were around…


All you got was criticism for all the work you did,
Now we understand how difficult it is to handle it…




Your care was silent yet everyone felt it always,

Now we need it badly but you are not around…

You could never see anybody cry,

Now every eye has a tear and prays all we saw was a lie…

 
 
 I so wish you to come back to hear what all we have to tell,
There is so much to apologize for, but now it will remain unsaid…

 
  
 

Saturday, 28 April 2012

"अंतर्द्वंद"

मैं टूट कर बिखर गया..
पर किसी को पता ना चला...



कुछ कागज़ के पत्तों के नाम पर ,
प्यार मेरा परवान चढ़ गया,
किसी को पता ना चला...

वो आने वाले कल में घुलती रही,
मैं अपने बीते हुए कल में सिमट गया, 
किसी को पता ना चला...

जी रहा हु अब कैसे,
या मैं राख हो गया, 
किसी को पता ना चला...


सुबह दुनिया की हुई,
मैं शाम हो गया, 
किसी को पता ना चला...

दुनिया मानो समंदर हो गयी,
और एक जहाज़ इसमें डूब गया,
किसी को पता ना चला...


मैं अँधेरे का शेह्ज़दा, 
अंधेरों से खुद ही डरने लगा, 
किसी को पता ना चला...

कब मैं झूठे व्यक्तित्व का पुलिंदा बना,
कब मेरे चेहरे पे उदासी का साया चढ़ गया,
किसी को पता ना चला...

दिल और प्यार तो था बेशुमार,
फिर भी मैं राजा से  रंक बन गया, 
किसी को पता ना चला...

सोचना समझना बस में नहीं था मेरे, 
कब मैं आशिक से दीवाना बन गया,
किसी को पता ना चला...

उनको लगा अलग हो गए हम,
अब ये सदा का संग हो गया,
किसी को पता ना चला...

कछुए की चाल से चल रही ये ज़िन्दगी,
वो रेंगता सा काँटा भी कब रुक गया,
किसी को पता ना चला...


मेरे जीवन का मतलब अब सिर्फ आक्रोश है, 
आँखे नहीं अब नम मेरी अन्दर बस एक क्रोध है,
किसी को पता ना चला...

खुदा है भी या अब सिर्फ नाम ही है,
अब तोह यही एक "अंतर्द्वंद" है, 
किसी को पता ना चला... 

Tuesday, 13 March 2012

Rangpanchami...



सुना  है  आज  रंग्पच्मी  है ...
मेरी  ज़िन्दगी  में  क्यों  रंगों  की  कमीं  है ...



क्यूँ  नहीं  कोई  ख़ुशी  कोई  उमंग  है ...
क्यूँ  नहीं  कहीं  पिचकारी  कहीं  पे  भंग  है ...
क्यूँ  हँसी  भी  खफा  खफा  सी  खड़ी  है ...
सुना  है  आज  रंगपंचमी है ...

क्यूँ  नहीं  कुछ  मीठा  कुछ  तीखा  यहाँ  है ...
क्यूँ  नहीं  हल्ला  और  मस्ती  भरी  टोली  यहाँ ...
क्यूँ  हर  शब्द  में  कड़वाहट  भरी  है ...
सुना  है  आज  रंगपंचमी  है ...

कहीं  धूप  बाती  कहीं  लो  जली  है ...
कहीं  पागल्पंती  कही  मस्ती  की  झड़ी  है ...
क्यूँ  यहाँ  पर  सिर्फ  जलती  राख  पड़ी  है ...
सुना  है  आज  रंग  पंचमी  है ...



सुना  है  आज  रंग्पच्मी  है ...
     मेरी  ज़िन्दगी  में  क्यों  रंगों  की  कमीं  है ...


Tuesday, 6 March 2012

टूटी नींद... टूटे सपने...




आज फिर आँख खुल गयी आधी रात में...
खिड़की  से  झाँक  रही थी  चांदनी ...
ना  जाने  किसकी  तलाश  में ...
शायद  वो  चाह  रही  थी  बीते  हुए  कल  पे  कुछ  रौशनी  लाना ...

नींद  आज  फिर  गुम  थी  आँखों  से ...
फिर  ख़्वाब  नहीं  थे  कही  भी ...
सब  टूटा  हुआ  नज़र  आ  रहा  है  आस  पास ...
कुछ  सूझ  नहीं  रहा  है  अब  मुझे ...

सोच  का  कभी  कोई  दायरा  नहीं  था ...
ना  ही  आज  कोई  दायरा  बना  पायी  मैं ...
फिर  परों  का  सहारा  लिए  उढ  चली  वो  जाने  कहाँ ...
शायद  वहां ... जहाँ  सोचा  न  था ...

बचपन  में  सब  कितना  अच्छा  लगता  था ...
पापा  का  प्यार  माँ  का  लाढ़ ...
दोस्तों  की  टोली , मंदिर  की  रोली ...
दुर्गा  का  खाना  और  शैतानी  की सवारी ...

मेले  में  जाना  झूले  झूल कर  आना ...
स्कूल  में  होमेवोर्क  नहीं  करके  ले  जाना ...
घर  पर  आकर  झूठ  बोलना  बहाने  बनाना ...
पापा  का  गुस्साना  और  फिर  भी  माँ  का  बचाना ...

बेहेन का  तोतली  सी  आवाज़  में  दीदी  बुलाना ...
उसको  अपनी  साइकिल  पे  घुमाना ...
विनय  नगर  की  गलियों  से  किले  तक  ले  जाना ...
शाम  को  मच्चार्तानी  में  कहानी  सुनाना ...

सोचा  ही  नहीं  की  कभी  वक़्त  भी  बदल  जायेगा ...
जिन्गदी  के  पन्नो  पे  स्कूल  की  जगह  कॉलेज  का  नाम  आएगा ...
कॉलेज  का  भी  अपना  ही  दौर  था ...
बड़ों  की  एक जगह  पर  बच्चो  का  शोर  था ...

सभी  लडकियां  सज  धज  कर आती  थी ...
पर  अपनी  टोली  तब  भी  बेतरतीबी  में  रंग  जमाती  थी ...
टीचर की  हर  बात  को  घुमा  कर  बोलना ...
और  फिर  हस्ते  हस्ते  सबके  सेन्स ऑफ़  ह्यूमर  को  तोलना ...

कौन  है  आजू  बाजू  कभी  सोचा  नहीं ...
घर  पे  ना  दिया  वक़्त  कभी ,चिल्ला  कर  कभी  कोई  रोका  नहीं ...
हमें  कभी  कोई  खबर  न  थी  मस्ती  में  हमारी ...
पर  धीरे  धीरे  बढ़  रही  थी  वक़्त  की  सवारी ...

धीरे  से  एम् बी ऐ   की  कोअचिंग  में  बंधा  समां ...
उफ़  ये  क्या  याद  कर  बैठी  मैं ...
ऎसी  कोई  अच्छी  भी  कहाँ  थी  ये  यादें ...
तीन  दोस्तों  का  मिलना  और  फिर ...

अच्छा  ही  था  मैं  अलग  हो  गयी  थी ...
आज  भी  कहाँ  छोड़ते  हैं  वो  काले  साए  मुझे ...
ज़िन्दगी  की  एक  कडवी  सच्चाई  जो  देखी  थी ...
दोस्त  की  शकल  में  एक  काली  परछाई  देखी  थी ...

आ  पहुची  मैं  पुणे ...
एम् बी ऐ के कॉलेज  में ,ज़िन्दगी  कितनी  बदल  गयी  है  यहाँ ..
अब  हमें  पढना  पड़ता  है ...
पर  कब  तक , ऑरकुट  भी  एक  सखा  अपना  है  यहाँ ...

जॉब  में  आके  ज़िन्दगी  मानो  बदल  सी  गयी ...
दोस्त  कुछ  बने  कुछ  फिर  मिली  काली  पर्चैयाँ ...
पर  कुछ  दोस्त  होते  हैं  अपने ...
साथ  नहीं  छोड़ते  चाहे  कितनी  भी  हो  रुस्वाइयाँ ...

दोस्त  मेरा  भी  कोई  बना ...
पता  नहीं  चला  कब  वक़्त  बदल  गया ...
सोच  बदल  रही  थी  समझ  बदल  रही  थी ...
दिशाए  बदल  रही  थी  वादे  बदल  रहे  थे ...

कैसे  हुआ  ये  समझ  नहीं  आ  रहा  मुझे ...
सही  हुआ  या  गलत  हुआ  नहीं  पता  मुझे ...
पर  आज  एक  ऐसे  दोराहे  पे  खड़ी  हु ...
ना जानू जिंदा  हु  या  जिंदा  लाश  सी  पड़ी  हु ...

सब  कुछ  बदला  सा  लग  रहा  है  अब  मुझे ...
क्या  हो  रहा  है  ये  ज़िन्दगी  को  और  कुछ  न  सूझे ...
क्या  बदल  गए  वो  रिश्ते  जिनके  साथ  लगता  था  कभी ...
कुछ  भी  हो  नहीं  बदलेंगे  ये  चाहे  साथ  छोड़े सभी ...

माँ  पापा  के  उस  प्यार  को  मैं  झुठला  नहीं  सकती ...
पर  मैं  भी  बड़ी  हो  गयी  हु  क्यों  ये  मैं  बतला  नहीं  सकती ...
चाहे  बहुत  कुछ  यहाँ  बुरा  हो  रहा  है ...
पर  फिर  भी  दुनिया  में  कुछ  नया  हो  रहा  है ...


आज  क्या  करू  मैं  कुछ  समझ  नहीं  पा  रही  हु ...
ख़ुशी  कहाँ  गयी  ज़िन्दगी  से , सिर्फ  गुम  में  गोते  खा  रही  हूँ  ...
मेरे  कारण  ना  जाने  कितनी  जिंदगियां  बन  बिगड़  जायेंगी ...
येही  सोच  कर   मैं  जड्ड हुई  जा  रही  हूँ  ...

ऐसा  नहीं  था की  नहीं  सोचा  था  मैंने  कभी  इसके  बारे  में ...
पर  अंत इतना  दर्द भरा होगा  जाना  नहीं  था  मैंने ...
मेरे  कारण  कितनो  की  नींद  है  बाकी  हिसाब  लगा  रही  हूँ ...
क्यों  कभी  ये  सपने  ही  बुने  थे  सोचे  जा  रही  हूँ  ...


इन  आंसुओ  का  मोल  कैसे  बता  पाऊँगी  मैं ...
जो  हर  किसी  को  दिए  जा  रही  हूँ   मैं ...
पापा  की  उस  आवाज़  का  और  माँ  ki सिसकियों  का  हिसाब  किसे  दे  पाऊँगी  मैं ...
तुम्हारी  तो  कोई  गलती  भी  नहीं  थी , बस एक  गलत  लड़की  से  दिल  लगा  बैठे ...

ये  कराहने  की  आवाज़  कैसी  ओह्ह !!  माँ  आज  भी  नहीं  सोई ...
यहाँ  मैं  नहीं  सोई  वहां  पापा  और  तुम  भी  नहीं  सोये  होगे ...
और  ये  चांदनी  अभी  भी  आ  रही  है  खिड़की  से  अन्दर ...
ना  जाने  और  कितना  सोचना  बाकी  है  की  ख़तम  ही  नहीं  होता ................

Tuesday, 10 January 2012

Maa I Love You.... :(


Roz savere uthkar jab, tere chahre ki vo mayoosiyan dekhti hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...

Teri koi galati na thi, fir bhi na tujhko khushi mili...
Roz ek nayi jung, patthar ki nayi laqeer mili...

                                              Chahti hu tujhe khushi dena.. par ghum hi deti jaati hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...


Tune bhi hai khawaab sajaye tere bhi kuch sapne hain...
teri bhi aashaye hain, kuch pal tere bhi apne hain...

Chahti hu tere sapne poore karna.. par todti main jaati hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...


zimmedari tu sab leti hai, kabhi nahi kuch kehti hai...
Zindagi k surkh thapede tu bas yuhi sehti rehti hai...

chahti hu main kuch dard hatanaa..par aur dard de jaati hu
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...


Un foolti saanso me bhi, tu sab kuch karti jaati hai...
Koi kaam adhoora nahi rahe, sabki takleef mitaati hai...

Ab aur naa tarse tu..karna kuch aisa chahti hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...


Tujhko bhi haq hai hasne ka,Duniya ki khushi ko chakhne ka...
Manzil apni to ek hi hai..khushi ki talaash me main bhi hu...
 




Diye banke tu roshan hai.. baati ban main jalna chahti hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...


Mujhpe tu kar bharosa, main teri har aah pe marti hu...
Sapne tere poore hongey bas ek hi waada karti hu...

Roz savere uthkar jab, tere chahre ki vo mayoosiyan dekhti hu...
Khud se main bas ek hi savaal karti hu...
ki jaane main kya karti hu.... Na jaane main kya karti hu...

Monday, 7 November 2011

Irony of Falling in Love.....


Human.... is the cruelest animal of anything on this planet earth. the most selfish.. the most illogical... the most insensitive.
and not to forget to mention THE MOST CUNNING... SELFISH CREATURE. 
Some might feel.. i wrote this is a rage of anger...but NO... this isnt just Rage of Anger.. This is a mixed feeling...
Feeling pity about few circumstances today...

This is yet another writeup,  Reason : LOVESICKNESS...
Falling in love.... : THE MOST BEAUTIFUL FEELING IN THE WORLD
Defined by : God, Philosophers, General Public...

Everybody has faith in love.. It is said to be the most beautiful feeling....

But Still why FALLING IN LOVE IS BAD???
Why is it still considered as a Taboo in our society...Lets not consider, whole of the world...
lets just talk about our own INDIA...
Lets talk niche...

I am a proud Indian....Yes Truely... I love the colours in Flag... I love when the Flag is hosted...
I love when we win Wars...
I love when we are considered as the upcoming super nation....I love just everythng about it...

Is it really this??? Or is this something.... I am fed..I dont even remember since when, here are things.. I dont like... i dont love... i cant endure bout this nation.

The biggest reason out of all is the diplomacy...We think non-sense... but we pretend to talk sense.
We are still struggling with powerty,but we showoff ourselves with F1, commenwealth, and a few billiniors we have.We still have a super conservative mentality, but we name it our Culture and tradition.We can sacrifice our loved once... for our NAME in SOCIETY.

Human..comes into existance after making love...Still people FALLING IN LOVE are criticised, hated. When we get into our senses... one of the most primary things we are taught is,
We live as a family, we are relatives and we have to live together, because we love each other. The word love is arranged with every relation god "arranged" for us, sent with us.

Everybody arond is very happy, because you are a sincere son / daugter of family, you love your family the most. You love the thing... god arranged for you...

But the same relations, the same people, the same smile changes abruptly, as soon as you start loving somebody...with was not arranged for you...
Something which is not arranged, but you fall in it.

I fell in love, real love.... which people might say immature... myt consider infactuation. But when i have spent 25years of my life with ARRANGED love everywere around, how can people suspect me, when i say I m into love.
When I say, I am into love, people start giving it points, start betting bout if its real or fake,right or wrong, can be successful or unsucceful.

But i dont understand.. what is right or wrong about love?? how can love be wrong...
Love for me is... a very simple straight forward thing.. which neither have expectations nor it has any doubts.
If you are in love... you are in love!!!
whats a big deal bout it???

In INDIA..  FALLING in love is a PAGE3 thing, for general public is a TABOO...Everybody around you is ashamed, as if, its not love.. its AIDS what you have....
I gues even AIDS sounds good.
Why cant we just accept it as it is...with a smile.
Reason I found is very simple....1) society.... who wont let you..and your family live...
and wont let your younger sibiings get married.
2) Everybodyz different defination.

And India has a terrible tendency in few cases, everybody here is a self-proclaimed Doctor, teacher, preacher, and philosopher.
And hence, has all the reserved rights to prove things right or wrong.

Everybody has their own reasons, to prove it ryt / wrong, same happened with me.
The maximum I am bothered with is My maa My Paa and yaah,,,, the kind of little sis.

Papa... WHO IS STILL UNAWARE OF MY STATE...as per him,,, I guess love dosnt exists at all,,.... atlest if you do not have any achievements in life, and if you are not Ranu (by ur hard luck)
Hez bought up that ways... not his fault too....

Maa....Love now is only... what mamaji defines or sometyms Mausi,or nanaji. Else... money is the most imp factor then love.
As she says, you can live yor life, without love,,, but money gives you social status and here comes happiness along.
Therez no logic behind her this theory, other then her sufferings in life, her post marrige traumaz, for all her life staying away from my father because of her kids bright future, and still getting no rewards, to be the poorest of all the sibilings, to have to fight alone about approximately everything around, still criticisms(a typical indian women life).

SIS : My 8years younger sis.who is just a 12th passout, a teen-ager.A teen-ager..but never sounds 1....
Same as me.. more mature then she should be....Though MY FAMILY never thought I was mature,,, but yaa.. psycologist do think so.
She feels, I am wrong.... because.. my guy isnt capable to lead my life... our life... Plus.. more of a Blend of my parents thinking and her own dreams for money and a succesful lyf.

As of now.. my mother and my sister dosent have courage to face society.... once IF AT ALL I GET MARRIED.
If we talk about the topic I am abused,rude comments,and decisions are passed on.

I guess... It has more to do with Psycology, then anything else. I am forced to move on, I am forced to get married to somebody else.
I might have to kill myself for it... for their sake, I might not be ME anymore.But nobody will care, I am sure, they will be hapy all their lives tinking,
they threw me into a sack full of money, and ASSUMPTION BASED THEORY WILL BE PASSED : SHE IS HAPPY.

I might not be able to make u. I might have to lead my life their way, I might have to sacrifice my Falled love to their Arranged(which is accpted by all means.)

I will never utter a single word...will move on(as per them) silently. will never held my family / parents responsible for anything...
But yes... I just hope... A day will come.. when they will realise, Falling in love, is as good as ARRANGED LOVE.
I hope... it wont be too late.. for them to understand, for me to go back,,,, for him to trust me again...

All I think today is..ARRANGE LOVE IS ALL PEOPLE CONSIDER IN INDIA EVEN NOW( 1 of the reasons for not liking India).....and...


FALLING IN LOVE IS THE MOST BEAUTIFUL FEELING BUT IRONICAL...



PS: This is a feel of anybody struggling in love... to get in it.. or to get out of it...

Thursday, 15 September 2011

I never felt this way before...


I dont know... what this feeling is called...
All i know its a strange feeling...
I m smiling all the way..
I have been smiling all the day...
I jumped and jumped and jumped...
and screamed on the road...
people looked at me..
but i just passed a grin...
i m not embarsd... rather i m blushing...
as if they know.. what i have been thinking..
i m not just happy...
but the feel is so different...

I dont know... what this feeling is called...
All i know its a strange feeling...

i never felt this way before...